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एचआरडीए में फर्जी आर्किटेक्ट का मायाजाल, भवन स्वामियों की जेब खाली कर खुद को कर रहे मालामाल!

बिना डिग्री और बिना रजिस्ट्रेशन के भवनों की फाइल करवा रहे पास, अधिकारियों की मिली भगत से चली जा रही चाल! 

रुड़की एचआरडीए में 126 आर्किटेक्ट का है रजिस्ट्रेशन, रजिस्टर्ड कुछ आर्किटेक्ट की शह पर फर्जी आर्किटेक्ट करवा रहे हैं भवन निर्माण! 


सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कई लोग अपना क्षेत्र छोड़कर रुड़की में आर्किटेक्ट का ऑफिस खोलकर नक्शे करवा रहे पास! 

रुड़की। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) में इन दिनों फर्जी आर्किटेक्टों का ऐसा मायाजाल फैलता नजर आ रहा है, जिसमें भवन स्वामी फंसकर अपनी जेब ढीली कर रहे हैं और कथित आर्किटेक्ट मोटी कमाई कर रहे हैं। आरोप है कि बिना मान्यता प्राप्त डिग्री और बिना वैध रजिस्ट्रेशन वाले कई लोग खुद को आर्किटेक्ट बताकर भवनों के नक्शे तैयार कर रहे हैं और उन्हें पास कराने का दावा भी कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार,  एचआरडीए में करीब 126 अधिकृत आर्किटेक्ट पंजीकृत हैं, जिन्हें ही नियमानुसार नक्शे तैयार करने और प्रस्तुत करने का अधिकार है। इसके बावजूद शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसे लोग सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनका प्राधिकरण में कोई पंजीकरण नहीं है, फिर भी वे खुलेआम भवन निर्माण से जुड़े कार्य कर रहे हैं। चर्चा है कि कुछ पंजीकृत आर्किटेक्टों की शह पर यह पूरा खेल चल रहा है, जिसके चलते नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

सूत्रों का दावा है कि उत्तर प्रदेश के कई लोग रुड़की में आर्किटेक्ट का कार्यालय संचालित कर रहे हैं । आरोप है कि यह भवन स्वामियों से संपर्क कर नक्शे तैयार करने और पास कराने का काम कर रहे हैं। यदि यह आरोप सही हैं तो मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि कई गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। इसके अलावा रुड़की क्षेत्र के भी कई लोगों ने शहर में जगह-जगह अपने ऑफिस खोलकर बड़े-बड़े बोर्ड लगा रखे हैं। इन पर भी कोई डिग्री और रजिस्ट्रेशन नहीं है। शहर में चर्चा है कि कई भवन स्वामियों को यह तक जानकारी नहीं होती कि उनका नक्शा किसके नाम से दाखिल किया गया है। उनसे मोटी फीस वसूली जाती है, जबकि वास्तविक दस्तावेज किसी अन्य पंजीकृत व्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किए जाते हैं। इससे भवन स्वामी भविष्य में कानूनी विवादों में भी फंस सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एचआरडीए के पास पंजीकृत आर्किटेक्टों की पूरी सूची उपलब्ध है, तो फिर गैर-पंजीकृत लोगों की गतिविधियों पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही? आखिर किसकी संरक्षण छाया में यह खेल फल-फूल रहा है? शहरवासियों का कहना है कि प्राधिकरण को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर फर्जी आर्किटेक्टों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भवन निर्माण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और आम लोगों का आर्थिक शोषण रुक सके।

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' जल्द ही ऐसे लोगों को चिन्हित कर उच्चाअधिकारियों को सूचित किया जाएगा। इसके बाद अधिकारियों के निर्देश मिलने पर ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करवाई जाएगी।...टीएस पंवार, एई, एचआरडीए रुड़की

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